Final Year Exams News अगली सुनवाई 18 अगस्त को

Final Year Exams News अगली सुनवाई 18 अगस्त को

Final Year Exams News : सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 महामारी के दौरान विश्वविद्यालयों में फाइनल ईयर की परीक्षायें आयोजित करने के यूजीसी के 6 जुलाई के निर्देश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई 18 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई शुक्रवार को सुबह 10:30 बजे शुरू की और यह 1 बजे तक चली। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने शीर्ष अदालत से कहा है कि फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स की हेल्थ भी उतनी ही अहमियत रखती है जितनी अन्य बैच के स्टूडेंट्स की रखती है।

सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि इन दिनों स्टूडेंट्स को ट्रांसपोर्टेशन व कम्युनिकेशन से जुड़ी काफी दिक्कतें आ रही हैं। महाराष्ट्र के कई कॉलेज क्वारंटाइन केंद्र के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

एक अन्य याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि देश भर के कॉलेजों में एक जैसी सुविधाएं नहीं हो सकतीं। कई कॉलेजों में कक्षाएं नहीं लगी हैं।

दिल्ली और महाराष्ट्र की सरकारों ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लेने से पहले अपने विश्वविद्यालयों के वीसी से सलाह मशविरा किया था जिन्होंने कहा था कि कई स्टूडेंट्स डिजिटली एग्जाम देने में असमर्थ हैं।

सिंघवी ने कहा कि यूजीसी के 15 अप्रैल, 1 मई व 29 जून के दिशा-निर्देशों में कोविड-19 की महामारी की गंभीरता को समझा गया और विश्वविद्यालयों को परीक्षा कराने या न कराने की ढील दी गई थी।

लेकिन अब जब संक्रमण के मामले बहुत ज्यादा अधिक हैं तो यूजीसी आखिर कैसे परीक्षा कराना अनिवार्य कर सकता है, वो भी तब जब कॉलेजों में पढ़ाई हुई ही न हो।

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Final Year Exams 2020 सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई 18 अगस्त को 

इससे पहले गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से अपने हलफनामे में उच्चतम न्यायालय से कहा था कि विद्यार्थी के अकादमिक करियर में अंतिम परीक्षा महत्वपूर्ण होता है

और राज्य सरकार यह नहीं कह सकती कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर 30 सितंबर तक अंत तक विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से परीक्षा कराने को कहने वाले उसके छह जुलाई के निर्देश बाध्यकारी नहीं है।

यूजीसी ने कहा कि छह जुलाई को उसके द्वारा जारी दिशा-निर्देश विशेषज्ञों की सिफारिश पर अधारित हैं और उचित विचार-विमर्श कर यह निर्णय लिया गया। आयोग ने कहा कि यह दावा गलत है कि दिशा-निर्देशों के अनुसार अंतिम परीक्षा कराना संभव नहीं है।

पूर्व में महाराष्ट्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर जवाब देते हुए यूजीसी ने कहा, ”एक ओर राज्य सरकार (महाराष्ट्र) कह रही है कि छात्रों के हित के लिए शैक्षणिक सत्र शुरू किया जाना चाहिए,

वहीं दूसरी ओर अंतिम वर्ष की परीक्षा रद्द करने और बिना परीक्षा उपाधि देने की बात कर रही है। इससे छात्रों के भविष्य को अपूरणीय क्षति होगी। इसलिए यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार के तर्क में दम नहीं है।

यूजीसी ने दिल्ली सरकार द्वारा शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे पर भी अपना जवाब दाखिल किया।उल्लेखनीय है कि 10 अगस्त को यूजीसी ने कोविड-19 महामारी के चलते दिल्ली और महाराष्ट्र सरकारों द्वारा राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षा रद्द करने के फैसले पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह नियमों के विपरीत है।

महाराष्ट्र सरकार के हलफनामे का जवाब देते हुए यूजीसी ने कहा कि यह कहना पूरी तरह से गलत है कि छह जुलाई को जारी उसका संशोधित दिशा-निर्देश राज्य सरकार और उसके विश्वविद्यालयों के लिए बाध्यकारी नहीं है।

आयोग ने कहा कि वह पहले ही 30 सितंबर तक सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों द्वारा अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने के लिए छह जुलाई को जारी दिशा-निर्देश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाबी हलफनामा दाखिल कर चुका है।

आयोग ने कहा कि दिशा-निर्देश में विश्वविद्यालयों या संस्थानों द्वारा अंतिम वर्ष की परीक्षा या अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा के लिए पर्याप्त ढील दी गई है और इसे जारी करने से पहले सभी हितधारकों से परामर्श किया गया है।

यूजीसी ने कहा कि महाराष्ट्र का हलफनामा उसके अपने ही दावे के विपरीत है कि मौजूदा परिस्थितियां कथित तौर पर ऐसी हैं कि विश्वविद्यालय एवं संस्थान अंतिम वर्ष की परीक्षा भी नहीं करा सकते हैं। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं है कि वे कथित परिस्थितियां अगला शैक्षणिक सत्र शुरू करने से भी रोकती हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 10 अगस्त को शीर्ष अदालत से कहा कि राज्य सरकारें आयोग के नियमों को नहीं बदल सकती हैं, क्योंकि यूजीसी ही डिग्री देने के नियम तय करने के लिए अधिकृत है।

मेहता ने न्यायालय को बताया कि करीब 800 विश्वविद्यालयों में 290 में परीक्षाएं संपन्न हो चुकी है जबकि 390 परीक्षा कराने की प्रक्रिया में हैं।

Final Year Exams News  को ले कर अभी स्थिति साफ नही है की सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनता है सबको इसी का इंतजार है ।

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