Varanasi Boatman problam: banaras ke navikon ka corona se bura haal: बनारस के नाविकों का कोरोना से बुरा हाल


अभिषेक जायसवाल,वाराणसी
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कोरोना के दूसरी लहर के कारण लगे कोरोना कर्फ्यू ने नाविकों को बड़ी चोट दी। लगभग डेढ़ महीने में नाव संचालन बन्द होने के कारण वाराणसी के नाविक दो जून की रोटी के लिए भी मोहताज हो गए। इस बीच अपने परिवार का पेट पालने के लिए किसी ने घर के गहने बेचे तो किसी ने कर्ज का सहारा लिया।

एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में दशाश्वमेघ घाट पर रहने वाले लवकुश साहनी ने बताया कि लॉकडाउन में हालात इतने खराब हो गए कि कभी किसी से 5- 10 हजार रुपये कर्ज तो कभी घर के गहने बेचकर परिवार को चलाना पड़ा। प्रशासन ने भी हमारी मदद नहीं की। दशाश्वमेघ के ही रहने वाले दिनेश कुमार साहनी ने बताया कि दो साल से हम लोग कभी कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन और फिर उसके बाद 4 महीने बाढ़ के कारण नाव का संचालन बन्द हो जाता है। ऐसे में स्कूल के बच्चों की फीस कैसे दे। घर का खर्च कैसे चलाए इस तरह की ढेरों परेशानियों से हम लोग जूझते चले आ रहे हैं।

पिछले बार सोनू सूद बने थे खेवनहार
साल 2020 में जब कोरोना के कारण देशभर में लॉकडाउन था तो आम गरीबों के आगे रोजी रोटी के संकट खड़ा हो गया। वाराणसी के नाविक समाज भी उसी में शामिल था। वाराणसी के ही एक सामजसेवी संगठन के पहल पर अभिनेता सोनू सूद वाराणसी के नाविकों के खेवनहार बने। वाराणसी के सभी नाविक परिवार को उन्होंने राहत सामग्री पहुंचाई,लेकिन कोरोना के दूसरे लहर के बाद लगे लॉकडाउन में कुछ नाविकों को छोड़ अन्य लोगो को किसी तरह की मदद नहीं मिली है।

अनलॉक से जगी आस
वाराणसी में कोरोना के दूसरी लहर का प्रकोप कम होने के बाद अब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वाराणसी में दुकान और मंदिरों के बाद नाविकों के सख्त तेवर को देख अब प्रशासन ने 14 जून से शर्तों के साथ गंगा में नाव की छूट दे दी है। नाव संचालन की छूट के बाद अब नाविकों में आस जगी है कि फिर से उनका रोजगार चलेगा तो परेशानियां दूर होंगी और जिंदगी फिर से पटरी पर लौटेगी।



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